जमीन विवाद में अमर्त्य सेन को मिला ममता का साथ, बोले- देश में चर्चा और असहमति की गुंजाइश कम

अमर्त्य सेन ने कहा- ‘‘कोई व्यक्ति जो सरकार को पसंद नहीं आ रहा है, उसे सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित किया जा सकता है और जेल भेजा सकता है.

नोबल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखते हुए शांति निकेतन पैतृक संपत्ति विवाद पर समर्थन को लेकर उनका धन्यवाद किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने शिक्षा मंत्रालय को लिखते हुए कैंपस की जमीन के अतिक्रमण करने वालों की सूची भेजी, जिसमें प्रोफेसर अमर्त्य सेन का भी नाम था. 87 वर्षीय अमृत्य सेन ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इस विवाद के बारे में उन्हें मीडिया से पता चला और यूनिवर्सिटी को कोई जमीन से उनका कोई ताल्लुकात नहीं है.

अमर्त्य सेन ने देश में चर्चा और असहमति की गुंजाइश कम होते जाने को लेकर रोष प्रकट किया. साथ ही, उन्होंने दावा किया कि मनमाने तरीके से देशद्रोह के आरोप थोप कर लोगों को बगैर मुकदमे के जेल भेजा रहा है. इधर, ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ विचार रखने के लिए अमर्त्य सेन को निशाना बनाया गया.

हालांकि, अकसर ही सेन की आलोचना के केंद्र में रहने वाली भाजपा ने इस आरोप को बेबुनियाद करार दिया है. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्राध्यापक सेन (87) ने समाचार एजेंसी पीटीआई को ईमेल के जरिए दिये एक इंटव्यू में केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन किया. इसके साथ ही, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन कानूनों की समीक्षा करने के लिए एक ‘‘मजबूत आधार’’है.

उन्होंने कहा, ‘‘कोई व्यक्ति जो सरकार को पसंद नहीं आ रहा है, उसे सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित किया जा सकता है और जेल भेजा सकता है. लोगों के प्रदर्शन के कई अवसर और मुक्त चर्चा सीमित कर दी गई है या बंद कर दी गई है.’’

प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘असहमति और चर्चा की गुंजाइश कम होती जा रही है. लोगों पर देशद्रोह का मनमाने तरीके से आरोप लगा कर बगैर मुकदमा चलाए जेल भेजा जा रहा है.’’उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि कन्हैया कुमार, शेहला राशिद और उमर खालिद जैसे युवा कार्यकर्ताओं के साथ अक्सर दुश्मनों जैसा व्यवहार किया गया है.

उन्होंने दावा किया, ‘‘शांतिपूर्ण एवं अहिंसक तरीकों का इस्तेमाल करने वाले कन्हैया या खालिद या शेहला जैसी युवा एवं दूरदृष्टि रखने वाले नेताओं के साथ राजनीतिक संपत्ति की तरह व्यवहार करने के बजाय उनके साथ दमन योग्य दुश्मनों जैसा बर्ताव किया जा रहा है. जबकि उन्हें गरीबों के हितों के प्रति उनकी कोशिशों को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने का अवसर दिया जाना चाहिए था.’’

चर्चा और असहमति की गुंजाइश कथित तौर पर सिकुड़ने के बारे में सेन के विचारों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई प्रमुख दिलीप घोष ने कहा कि उनकी (सेन की) दलील बेबुनियाद है.

घोष ने कहा, ‘‘आरोप बेबुनियाद हैं. यदि वह देखना चाहते हैं कि असहिष्णुता क्या है तो उन्हें पश्चिम बंगाल की यात्रा करनी चाहिए, जहां किसी भी विपक्षी दल के पास अपने कार्यक्रम करने के लिए लोकतांत्रिक अधिकार नहीं है.’’

भाजपा नीत सरकार को लेकर सेन के विचारों के बारे में पूछे जाने पर प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘जब सरकार गलती करती है तो उससे लोगों को नुकसान होता है, इस बारे में न सिर्फ बोलने की इजाजत होनी चाहिए, बल्कि यह वास्तव में जरूरी है. लोकतंत्र इसकी मांग करता है.’’ उल्लेखनीय है भाजपा नीत सरकार के बारे में सेन के विचारों को अक्सर ही विपक्ष के समर्थन में देखा जाता है. सेन ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की समीक्षा करने के लिए मजबूत आधार हैं क्योंकि इन कानूनों के खिलाफ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं.

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