शिव महिमा : भक्तों की हर अभिलाषा पूरी करते हैं महादेव

भगवान भोलेनाथ की महिमा का कोई छोर नहीं है, सावन के पवित्र महीने में उनकी कृपा बढ़ जाती है। जब वह प्रसन्न होते हैं तो क्षणभर में भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण कर देते हैं।

वहीं, जब क्रोधित हो जाएं तो उनके तेज से संसार की बड़ी से बड़ी शक्ति भी नहीं जीत सकती है। परमात्मा शिव के इसी स्वरूप द्वारा मानव शरीर को रुद्र से शिव बनने का ज्ञान प्राप्त होता है। भगवान शिव को भक्तों ने बहुत से नाम दिए हैं, जिनमें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र और नीलकंठ आदि शामिल हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है, यह व्यक्ति की चेतना को पढ़ लेते हैं। भगवान शिव की अर्धागिनी माता शक्ति कहलाती हैं, जिनका नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय व गणेश और पुत्री अशोक सुंदरी हैं।

भगवान भोलेनाथ किसी भी भक्त को कई बार भूलवश हुए थोड़े से पूजन पर भी मनचाहा वरदान दे देते हैं। उनका यह स्वभाव कई पौराणिक कथाओं में नजर आता है, जिनमें उनका राम नाम के प्रति प्रेम भी प्रतीत होता है। एक बार भगवान शिव कैलाश पर्वत पहुंचे और माता पार्वती से भोजन मांगा। पार्वती उस वक्त भगवान विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ कर रही थीं। माता पार्वती ने कहा कि अभी पाठ पूरा नहीं हुआ है, इसलिए थोड़ी देर प्रतीक्षा कर लीजिए। भगवान शिव ने कहा कि इसमें तो समय और श्रम दोनों लगेंगे। संत लोग जिस तरह से सहस्त्र नाम को छोटा कर लेते हैं और नित्य जपते हैं वैसा उपाय कर लो।

माता पार्वती ने पूछा कि वह उपाय क्या है?

मैं सुनना चाहती हूं तो भगवान शिव ने बताया कि केवल एक बार राम नाम जप लो, तुम्हें सहस्त्र नाम, भगवान के एक हजार नाम लेने का फल मिल जाएगा। एक राम नाम हजार दिव्य नामों के समान है। यह सुनकर माता पार्वती ने ऐसा ही कर अपना पाठ पूरा कर लिया। इस तरह से भगवान शिव की तुरंत निर्णय लेने क्षमता भी दिखाई देती है।

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