रेलवे की परीक्षा में डिजाइनर मास्क, गमछा और रुमाल पहनने पर रोक, ये है वजह

रेलवे के नान टेक्निकल और मिनिस्ट्रीयल की पापुलर कैटेगरी के सैकड़ों पदों पर भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाएं 15 से 18 दिसम्बर तक होंगी.

प्रयागराज: कोरोना और लाकडाउन की वजह से महीनों से रुकी हुई रेलवे की भर्ती परीक्षाएं 15 दिसम्बर से शुरू हो रही हैं. नकल और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए रेलवे भर्ती बोर्ड ने इस परीक्षा में अभ्यर्थियों के लिए गमछे और रुमाल के साथ डिजाइनर मास्क पहनकर आने पर रोक लगा दी है. अभ्यर्थियों को हिदायत दी गई है कि वह सामान्य सर्जिकल मास्क पहनकर ही सेंटर्स पर आएं. जो अभ्यर्थी डिजाइनर या ज़्यादा चौड़े मास्क के साथ ही चेहरे को गमछे या रुमाल से ढककर आएंगे, उन्हें सेंटर्स पर रेलवे की तरफ से मुफ्त में सर्जिकल मास्क दिया जाएगा. इसके लिए अभ्यर्थियों को ज़रूरी निर्देश दिए जा चुके हैं.

रेलवे भर्ती बोर्ड ने यह कदम मास्क की आड़ में नकल किये जाने, ब्लूटूथ व कोई डिवाइस छिपाए जाने और अभ्यर्थी की जगह किसी मुन्ना भाई को बिठाए जाने की आशंकाओं के मद्देनजर उठाया है. इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों पर कोविड प्रोटोकॉल के नियमों का भी सख्ती से पालन कराया जाएगा. अभ्यर्थियों को बिठाने में छह फिट की दूरी का ख्याल रखा जाएगा. रेलवे की तरफ से केंद्रों पर सेनेटाइजर के भी इंतजाम रहेंगे.

किसी अभ्यर्थी की तलाशी भी नहीं ली जा सकती

रेलवे के नान टेक्निकल और मिनिस्ट्रीयल की पापुलर कैटेगरी के सैकड़ों पदों पर भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाएं 15 से 18 दिसम्बर तक होंगी. आरआरबी इलाहाबाद के तहत कुल 119 पद हैं. इन 119 पदों के लिए 15 हज़ार से ज़्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है. इन अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के आठ शहरों में बनाए गए 39 केंद्रों पर होनी है. अभ्यर्थियों को 11 दिसम्बर से एडमिट कार्ड जारी किये जाएंगे.

रेलवे भर्ती बोर्ड इलाहाबाद के चेयरमैन आर ए जमाली के मुताबिक इस भर्ती परीक्षा में कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के साथ ही गड़बड़ी रोकने पर भी पूरी तरह फोकस किया जाएगा. पहले की भर्ती परीक्षाओं में कुछ गड़बड़ियां देखने को मिली थीं. इस बार कोविड की वजह से लोग चेहरे को मास्क से ढके रहेंगे. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से इस बार किसी अभ्यर्थी की तलाशी भी नहीं ली जा सकती. ऐसे में इस तरह का एहतियाती कदम उठाना बेहद ज़रूरी था. अभ्यर्थियों ने रेलवे के इस फैसले पर मिली जुली प्रतिक्रिया जताई है. कोई इसे ठीक कदम बता रहा है तो कोई गैरज़रूरी.

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