बंगाल चुनाव: TMC विधायक मिहिर गोस्वामी ने थामा BJP का दामन, ममता की पार्टी पर लगाए ये आरोप

शुक्रवार का दिन टीएमसी के लिए झटकों भरा रहा. मिहिर गोस्वामी से पहले शुक्रवार को पार्टी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. बीते कई दिनों से उन्होंने बगावती रुख अपनाया हुआ था. शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार में परिवहन मंत्री के पद पर तैनात थे और बंगाल की राजनीति में बड़ा रुतबा रखते हैं.

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को झटका लगा है. पार्टी के विधायक मिहिर गोस्वमी ने बीजेपी का दामन थामन लिया है. उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में बीजेपी कार्यालय पर पार्टी की सदस्यता ली. कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सदस्यता दिलाई.

टीएमसी से इस्तीफा दे चुुके मिहिर ने ममता की पार्टी पर निशाना साधा था. गुरुवार को उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “मेरे लिए टीएमसी में बने रहना मुश्किल हो गया है. वह पार्टी में और तिरस्कार नहीं सह सकते हैं.” कूचविहार से टीएमसी विधायक रहे गोस्वामी 1998 से टीएमसी के सदस्य थे. चुनाव से पहले उन्होंने टीएमसी का साथ छोड़ बीजेपी का साथ पकड़ लिया है.

वह पहले से ही बीजेपी नेताओं के संपर्क में थे. हालांकि शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर वह बीजेपी में शामिल हो गए. उन्होंने आरोप लगाया था कि टीएमसी में उनकी अनदेखी की जा रही है. उनका कहना था कि उन्होंने यह बात टीएमसी प्रमुख को भी बताई थी लेकिन जब चीजें हद से बाहर हो गईं तो उन्होंने यह फैसला लिया. उन्होंने कहा कि यह वो टीएमसी नहीं है जिसमें वह दशकों पहले शामिल हुए थे. टीएमसी में अब चीजें बदल चुकी हैं.

शुक्रवार का दिन टीएमसी के लिए झटकों भरा रहा. मिहिर गोस्वामी से पहले शुक्रवार को पार्टी नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. बीते कई दिनों से उन्होंने बगावती रुख अपनाया हुआ था. शुभेंदु अधिकारी ममता सरकार में परिवहन मंत्री के पद पर तैनात थे और बंगाल की राजनीति में बड़ा रुतबा रखते हैं. बीते कुछ दिनों से उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की अटकलें तेज थीं.

मंत्री पद के साथ शुभेंदु अधिकारी ने हल्दिया डेवलेपमेंट अथॉरिटी के पद से भी इस्तीफा दिया है. शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद ममता बनर्जी ने रिक्त हुए विभाग का पद खुद संभाला है.

बता दें कि पश्चिम बंगाल में भी अगले साल की शुरुआत में ही चुनाव होने हैं. 2016 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी सबसे ज्यादा 211 सीटें जीतने में सफल रही थी. वहीं, कांग्रेस ने 44 और वामपंथी दलों ने 26 सीटें जीती थीं जबकि बीजेपी को महज तीन सीटों पर ही जीत मिल सकी थी. वहीं, अन्य दलों ने दस सीटों पर जीत हासिल की थी.

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