किसान आंदोलन:पंजाब में विरोध के बाद BJP नेता होटल से भागे, उत्तराखंड में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पर ट्रैक्टर चढ़ाया

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को एक महीना पूरा हो गया है। दो राज्यों में शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों का उग्र रूप देखने को मिला। पंजाब के फगवाड़ा में किसानों ने BJP नेताओं का घेराव किया। BJP के नेता यहां अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के कार्यक्रम में पहुंचे थे। किसानों के विरोध की वजह से इन नेताओं को पुलिस सुरक्षा में होटल के पिछले दरवाजे से निकालना पड़ा।

वहीं, उत्तराखंड के उधमसिंह नगर में प्रदर्शन कर रहे किसानों को पुलिस ने बाजपुर में बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की। इस पर एक किसान ने बैरिकेड पर ही ट्रैक्टर चढ़ा दिया। हालांकि, इस घटना में किसी को चोट नहीं पहुंची है। उधर, दिल्ली में पुलिस ने चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर बंद कर दिए हैं। शनिवार को NH-44 को भी ट्रैफिक के लिए बंद रखा जाएगा।

रेल मंत्री ने कहा- किसानों के पास तर्क नहीं, इसीलिए चर्चा से भाग रहे हैं
इधर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों के अलग-अलग बयान सामने आए। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने गोयल ने कहा- दिल्ली बॉर्डर पर बैठे लोगों को गलतफहमियां हैं। वहां बैठे किसान एक ही इलाके से आते हैं। उन्होंने दो बार भारत बंद कराने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हुए। उनके पास कोई तर्क नहीं है, इसलिए वे चर्चा से भाग रहे हैं।

कृषि मंत्री बोले- किसानों को गुमराह करने वालों को जनता सबक सिखाएगी
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो किसानों के हमदर्द बनकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं, उनको भविष्य में जनता सबक सिखाएगी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को छोड़ सभी राज्य पीएम किसान सम्मान निधि योजना में शामिल हैं। मैंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर स्कीम में शामिल होने के लिए कहा है। वहां इस स्कीम से 70 लाख किसानों को फायदा होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा- किसान चाहें तो चर्चा के लिए कृषि विशेषज्ञों को साथ लाएं
पीएम के किसानों को संबोधित करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- PM समेत हम सब किसानों से अपील करना चाहते हैं कि बैठिए, हर कानून पर हमारे साथ चर्चा कीजिए। मैंने तो यह भी अनुरोध किया है कि आप कृषि विशेषज्ञों को लाना चाहते हैं तो उन्हें भी लेकर आइए। सरकार बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

वित्त मंत्री बोलीं- ये कानून मोदी जी लाए, इसलिए विपक्ष विरोध कर रहा है

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्षी दलों ने किसानों को राहत देने के लिए तीनों कृषि कानूनों को जरूरी बताया था। सरकार जो कानून लाई है, वे उनके नहीं हैं, वे तो मोदी जी के हैं। इसलिए वे इन्हें स्वीकार नहीं कर सकते और विरोध कर रहे हैं।

वहीं, हरियाणा CM मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसानों से अपील है कि मंच पर आकर सरकार से बात करें। इन बिलों में उन्हें जो ऐतराज है, उस पर बात करें। सरकार मानने के लिए तैयार है, सरकार ने कई प्रावधानों को बदलने के लिए कहा भी है।

हरियाणा में टोल फ्री कराए

हरियाणा में किसानों ने आज से टोल फ्री कर दिए। यह सिलसिला 27 दिसंबर तक जारी रहेगा। उधर, भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) ने कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगा दी। भाकियू (भानु) गुट पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ हो सकती है।

किसान बोले- सरकार गोलमोल बातें कर उलझा रही
भारतीय किसान यूनियन के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि सरकार अभी भी गोलमोल बातें कर उलझा रही है। वह किसानों को दो फाड़ करने के लिए अलग-अलग मीटिंग करना चाहती है, जो हमें मंजूर नहीं। कोई ठोस फैसला न होने पर देशभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा।

किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।

कई जगह जियो के टावरों की बिजली काटी
मांगें पूरी नहीं होती देख किसानों ने मलोट, संगरूर, फिरोजपुर, मोगा, पट्‌टी, छेहरटा समेत कई जगहों पर गुरुवार को रिलायंस जियो के टावरों के बिजली कनेक्शन काट दिए। हरियाणा में सिरसा के गांव गदराना में भी टावर की बिजली काटी गई। वहां पुलिस पहुंची, लेकिन कनेक्शन बहाल नहीं करा पाई। वहीं, जींद के उचाना में डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला के लिए बने हेलीपैड को किसानों ने उखाड़ दिया। प्रदर्शनकारियों ने वहां पर काले झंडे लगा दिए। विरोध को देखते हुए डिप्टी CM का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

किसानों के मुद्दे पर 7 अमेरिकी सांसदों ने लेटर लिखा
अमेरिका के 7 सांसदों ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को लेटर लिखा है। इनमें भारतीय मूल की प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं। पत्र में पोम्पियो से अपील की गई है कि वे किसान आंदोलन के मुद्दे पर भारत सरकार से बातचीत करें। चिट्ठी में लिखा है कि किसान आंदोलन की वजह से कई भारतीय-अमेरिकी प्रभावित हो रहे हैं। उनके रिश्तेदार पंजाब या भारत के दूसरे राज्यों में रहते हैं। इसलिए आप अपने भारतीय समकक्ष (विदेश मंत्री एस जयशंकर) के सामने यह मुद्दा उठाएं।

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