‘आश्रम’ वेब सीरीज में हिंदू संतों को विवादित तरीके से पेश करने पर प्रकाश झा और बॉबी देओल को नोटिस जारी

वेब सीरीज का दूसरा सीजन ‘आश्रम चैप्टर 2- द डार्क साइड’ 11 नवंबर को रिलीज हुआ था लेकिन इसमें हिंदू संत को विवादित रूप से पेश किये जाने को लेकर इसकी आलोचना भी हुई थी.

जोधपुर की एक अदालत ने हाल में रिलीज ओवर-द-प्लेटफॉर्म (ओटीटी) वेब सीरीज आश्रम में एक हिंदू संत को विवादास्पद तरीके से दिखाए जाने से जुड़ी याचिका पर सोमवार को फिल्मकार प्रकाश झा और अभिनेता बॉबी देओल को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है. ओटीटी एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां इंटरनेट के माध्यम से उपभोक्ताओं को वीडियो उपलब्ध कराए जाते हैं.

एमएक्स प्लेयर की वेब सीरीज में बॉबी देओल मुख्य भूमिका में जो किरदार निभाते दिखे, वह कुछ स्वयं-भू संतों की तरह का है जो राजस्थान के जोधपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में दंडनीय अपराधों के लिये दोषी ठहराए जाने के बाद जेल की सजा भुगत रहे हैं.

जोधपुर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने झा और देओल को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में अगली सुनवाई 11 जनवरी को तय की है. एक दोषी ‘संत’ के नाम से मिलती जुलती वेब सीरीज आश्रम के खिलाफ याचिका स्थानीय निवासी कुश खंडेलवाल द्वारा दायर की गई है.

खंडेलवाल ने अपनी याचिका में दावा किया, “हिंदू संत के तौर पर देओल के किरदार से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं जो संतों का सम्मान करते हैं और उन्हें पूजते हैं. दुष्कर्मी, भ्रष्ट और मादक द्रव्यों के कारोबारी के तौर पर दिखाए गए उनके किरदार से हिंदुओं के मन में संतों के प्रति जो भावना है वह प्रभावित होती है.”

खंडेलवाल ने इससे पहले पुलिस में शिकायत देकर दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था लेकिन स्थानीय पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्होंने इसी अनुरोध के साथ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का रुख किया. इस अदालत से याचिका खारिज होने के बाद खंडेलवाल ने जोधपुर जिला व सत्र न्यायाधीश की अदालत में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी.

वेब सीरीज का दूसरा सीजन ‘आश्रम चैप्टर 2- द डार्क साइड’ 11 नवंबर को रिलीज हुआ था लेकिन इसमें हिंदू संत को विवादित रूप से पेश किये जाने को लेकर इसकी आलोचना भी हुई थी. सोशल मीडिया पर भी एक अभियान चलाकर इसे हिंदू धार्मिक संस्कृति और ‘आश्रमों’ को दुर्भावनापूर्ण रूप से दिखाने वाला करार दिया गया था. करणी सेना ने भी फिल्म के निर्माताओं को कानूनी नोटिस भेजा था.

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