वाराणसी: भगवान को भी लगी ठंड…पहनाया गया स्वेटर, कंबल-रजाई का भी इंतजाम

भक्त, भाव और भगवान. इन तीन शब्दों का आपस में गहरा नाता है. यही वजह है कि इस बार वक्त से कुछ पहले आई ठंड के कारण काशी के मंदिर में भगवान की पूजा के साथ-साथ भक्त अपने भगवान को ठंड से बचाने के लिए उनका रजाई और स्वेटर से श्रृंगार भी कर रहे हैं. 

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के मंदिरों में भगवान को ठंड से बचने के लिए न केवल स्वेटर, बल्कि रजाई-कंबल तक की जरूरत पड़ रही है. लोहटिया स्थित प्राचीन बड़ा गणेश मंदिर में विघ्नहर्ता के श्रृंगार में रजाई का इस्तेमाल हुआ है और श्रद्धालुओं ने गणेश जी को ठंड और शीतलहर से बचाने के लिए रजाई-कंबल ओढ़ाए हैं.

इसके नजदीक ही राम-जानकी मंदिर में पूरी की पूरी राम दरबार और राधा-कृष्ण के विग्रह तो ऊनी वस्त्रों से ढके हुए हैं. इसमें ऊनी कपड़ों से लेकर टोपियां तक शामिल हैं. काशी के श्रद्धालुओं के लिए भगवान और भक्त में यही समानता है कि अगर ठंड भक्त को लग रही है तो भगवान को भी लगती होगी. लेकिन इस बार बेवक्त बढ़ी ठंड ने लोगों को काफी हैरान और परेशान किया हुआ है. 

एक श्रद्धालु प्रियंका कहती हैं कि ऐसा लगता है कि इस बार लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण में कमी आई है, जिसके चलते प्रकृति अपने मूल स्वरूप में लौटी है और वक्त से पहले ही कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है. वे बताती हैं कि आस्थानुसार जो हम भगवान को अर्पित करते हैं वही वापस भी मिलता है. इसलिए ठंडी में वे भगवान को ऊनी वस्त्र और रजाई से श्रृंगार करते हैं.

बड़ा गणेश मंदिर के पुजारी प्रदीप बताते हैं कि इस बार वक्त से पहले ही ठंड पड़ने लगी है. हर वर्ष कार्तिक माह के बैकुंठ चतुर्दशी से भगवान को गर्म कपड़े पहनाना शुरू होता है जो बसंत पचंमी तक चलता है. जिस तरह से इंसान को ठंड लगती है उसी तरह देवता को भी लगती है. यह भावना की पूजा है. 

राम-जनकी मंदिर के पुजारी देवेंद्रनाथ भी बताते हैं कि इंसान की तरह ही भगवान को भी ठंड के कपड़ों के अलावा ज्यादा ठंड पर हीटर और ब्लोअर तक लगाया जाता है. एक श्रद्धालु शीलम बताती हैं कि भगवान को ऊनी वस्त्र अर्पित करने के पीछे भावना को प्रकट करना होता है. 

वाराणसी में ठंड के आकड़ों की बात करें तो तापमान साढ़े 6 डिग्री तक गिर चुका है. वाराणसी में इन दिनों अधिकतम तापमान 18 डिग्री तो न्यूनतम साढ़े 6 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है. वहीं आइएमडी के अनुसार शहर में शीतलहर की भी शुरूआत हो चुकी है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो वाराणसी के लोगों के लिए आने वाले दिन काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं.

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