अनिल कपूर और अनुराग कश्यप की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘AK vs AK’ से वायु सेना क्यों है नाराज़, जानिए क्या है पूरा विवाद

फिल्म्स और वेब-सीरीज़ में सेना और सैनिकों की इमेज को तोड़-मरोड़ कर दर्शकों के सामने पेश करने से नाराज़ रक्षा मंत्रालय ने अगस्त के महीने में फिल्म सेंसर बोर्ड और सूचना और प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई थी.

नई दिल्ली: नेटफलिक्स की फिल्म ‘एके वर्सेज एके’ में वायुसेना की यूनिफॉर्म को गलत तरीके से पहनने और यूनिफॉर्म में गाली-गलौच और झगड़ते हुए दिखाने पर इंडियन एयरफोर्स ने कड़ा ऐतराज जताया है. वायुसेना ने फिल्म का टीज़र देखकर साफ तौर से कहा है कि नेटफ्लिक्स को ऐसे सीन हटाने होंगे.

दरअसल, फिल्म स्टार अनिल कपूर ने अपने ट्विटर एकाउंट पर नेटफ्लिक्स ऑरिजिनल फिल्म, ‘एके वर्सेज एके’ का टीजर साझा किया था. इसमें अनिल कपूर वायुसेना की यूनिफॉर्म की शर्ट पहने दिख रहे हैं, लेकिन पैंट उन्होनें सिविलियन पहन रखी है. एयरफोर्स की शर्ट भी पैंट से बाहर है और वे फिल्म निर्माता-निर्देशक (और एक्टर) अनुराग कश्यप से लड़ते दिख रहे हैं. इसी को लेकर वायुसेना ने अनिल कपूर के ट्वीट को कोट के साथ रिट्वीट कर अपनी आपत्ति जताई है.

आपको बता दें कि फिल्म्स और वेब-सीरीज़ में सेना और सैनिकों की इमेज को तोड़-मरोड़ कर दर्शकों के सामने पेश करने से नाराज़ रक्षा मंत्रालय ने अगस्त के महीने में फिल्म सेंसर बोर्ड और सूचना और प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई थी. रक्षा मंत्रालय ने इस पत्र के माध्यम से साफ कर दिया था कि जो भी निर्माता-निर्देशक सेना पर आधरित फिल्म, वेब-सीरीज़ या फिर डॉक्यूमेंट्री बनाएगा या सैनिकों से जुड़ा किरदार या वर्दी दिखाएगा, उसे पहले रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेनी होगी.

रक्षा मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी, सुदर्शन कुमार ने मुंबई स्थित सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के रिजनल-ऑफिसर को साफ तौर से लिखा था कि किसी भी फिल्म या वेब-सीरीज़ को दर्शको के सामने लाने से पहले रक्षा मंत्रालय से एनओसी यानी ‘नो ओबजेक्शन सर्टिफिकेट’ लेना होगा.

रक्षा मंत्रालय के पत्र में ये भी साफ लिखा था कि सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि इस तरह की फिल्मों या वेब-सीरीज़ में डिफेंस फोर्सेज़ (यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना) की इमेज को खराब ना करें और ना ही उनकी भावनाओं को आहत पहुंचाएं.

रक्षा मंत्रालय की ये कड़ी आपत्ति ऐसे समय जताई गई थी, जब अल्ट-बालाजी की वेब सीरीज़ ‘ट्रिपल एक्स-अन‌सेंसर्ड’ में सेना से जुड़े आपत्तिजनक सीन दिखाए गए थे, जो हकीकत से कोसों दूर थे और सैनिकों सहित मिलिट्री-यूनिफार्म को अपमानजनक तरीके से पेश किया गया था. इस सीरीज़ को लेकर सेना और सैनिकों में खासा रोष था. यहां तक कि अल्ट-बालाजी के खिलाफ पूर्व फौजियों के संगठनों ने एफआईआर तक दर्ज करा दी थी.

विवाद बढ़ता देख बालाजी फिल्म की मालकिन, एकता कपूर ने सार्वजनिक रूप से इस सीरीज़ के लिए माफी मांगी थी और उस‌‌ एपिसोड को ओटीटी (ओवर द टॉप टेबल) प्लेटफॉर्म से हटा दिया था. लेकिन सेना और रक्षा मंत्रालय ने इस सीरीज़ को बेहद ही आपत्तिजनक पाया था. रक्षा मंत्रालय को इस बारे में निर्माता निर्देशक के खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं. इसीलिए एनओसी लेना वाला ये कदम उठाया गया था.

इसी तरह की एक दूसरी वेब-सीरीज़, ‘कोड एम’ में भी सेना और सैनिकों की गलत तस्वीर दर्शकों के सामने पेश की गई. इसीलिए, रक्षा मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड, सूचना और प्रसारण मंत्रालय‌ और इंफोर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी मंत्रालय को पत्र लिखकर सभी प्रोडेक्शन-हाउसेज़ को किसी भी फिल्म, वेब सीरीज़ और डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन करने से पहले एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया.

हालांकि, कई बार पहले भी ऐसा सामने आया था कि फिल्म में सैनिकों की वर्दी पर गलत बैज या स्टार दिखाई पड़ते थे, लेकिन सेना उस तरह की गलतियों को नजरंदाज कर देती थी. लेकिन हाल में वेब सीरीज़ पर प्रसारित कंटेंट ने सारी मर्यादाएं लांघ दी हैं और सेना सहित सैनिकों की वर्दी को लेकर बेहद अपमानजनक सीन दर्शकों के सामने प्रस्तुत किए गए थे.

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